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रविवार, 8 नवंबर 2009

गीता कोडा पर भी कार्रवाई होनी चाहिये?

कांग्रेस, राजद,झामुमो जैसे दलो की बदौलत मुख्यमंत्री बने निर्दलीय विधायक मधु कोडा ने समुचे झारखण्ड को गिरवी रख कर करोडो-अरबो की काली कमाई की और इन दिनो कानून की गिरफ्त मे है। वेशक उनकी जांच प्रक्रिया काफी लम्बी होगी. मधु कोडा भी अन्य निकम्मे व भ्रष्ट नेताओ की तरह पूरे देश मे बिचरेगे या कमजोर राजनीतिक आधार के कारण निश्चित सज़ा मिलेगी. हमारी चरमराती न्यायिक प्रक्रिया के आलोक मे कुछ भी नही कहा जा सकता. संयुक्त बिहार मे सत्ता प्रमुख व उसके सिपह्सलाहकारो ने चारा,अलकतरा,भूमि,पहाड,कोयला आदि चुन-चुन कर खाया। बंटबारे के बाद जब झारखण्ड राज्य का गठन हुआ तो लोगो मे वेहतर भविष्य के उल्लास नजर आये थे। लेकिन यह क्या ? मरांडी,मुंडा हो या कोडा-सोरेन. जिसे जितना मौका मिला, प्रायः इस प्रांत के हर हलके को गिरवी रख सिर्फ अपने बाप-दादे के खजाने भरे।मधु कोडा के बारे जो भी मामले उभरकर सामने आये है, उसका बारीकी से अध्ययन करने पर एक नया तथ्य सामने यह आता है कि आखिर हर गुनाहो व जिन्दगी के आजीवन साझीदार उनकी पत्नि गीता कोडा को को भी सजा मिलनी चाहिये कि नही।जब मधु कोडा के दिन दुर्दिन भरे थे, तब यह महिला उन्हे छोड कर दूसरे व्यक्ति एक कमाऊ अभियंता से शादी कर ली थी और जब मधु कोडा मुख्यमंत्री बनकर अरबपति बन गये तो पुनः वापस आकर साथ रहने लगी तथा एक बच्ची को जन्म दिया. कहते है कि मधु कोडा को गांव के धान-चोर से प्रदेश-चोर बनाने मे उनकी पत्नि की अहम भूमिका रही है।पिछले दिन की बात है. इधर मधु कोडा का अपोलो मे ईलाज के बाद उनकी गिरफ्तारी के व्यापक इंतजाम हो रही थी , उधर उनकी पत्नि गीता कोडा रजरप्पा अवस्थित मा छिन्न मस्तिके के दरवार मे 11 बडे बकरे की बलि दे रही थी अपने पर आये संकट निवारण के लिये. इस प्राचीन व प्रसिध्द मन्दिर मे उपस्थित हजारो लोग यह देखकर काफी दंग थे कि वे न जाने किस भय से बलि दिये गये सभी बकरो को यू ही छोड कर भाग गई.

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