बात चाहे देश में आतंकवाद-उग्रवाद की बढती समस्या हो या फिर मँहगाई जैसे अन्य मसले की ,जितने कमजोर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दिखते हैं,उनसे
कहीं अधिक निकाम्मे उनके मंत्रीगण।केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार सरीखे लोग कहते फिर रहें है कि भूखमरी के दौर में गोदामों में गोबर बन रहे अनाजों की जबाबदेही उनकी नहीं है।
कहीं अधिक निकाम्मे उनके मंत्रीगण।केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार सरीखे लोग कहते फिर रहें है कि भूखमरी के दौर में गोदामों में गोबर बन रहे अनाजों की जबाबदेही उनकी नहीं है।केन्द्रीय गृह मंत्री पी चितंबरम का तो कोई सानी नहीं है। उन्हें लगता है कि देश के हालात जितने बिगड़ेगें,उनकी चर्चाएं भी उतनी बढेगी।इन दिनों वे कथित "भगवा आतंकवाद" के मामले को लेकर वे सुर्खियों में हैं। यदि हम उनके बयानों पर गौर फरमाएं तो यह साफ़ होता है कि ये जनाब देश में कथित "भगवा आतंकवाद" होने साथ उसकी पुष्टि से सभी साफ़ मुकर रहे हैं.क्या इस तरह के मामलों की नोटिश लेने वाला यहाँ कोई नहीं है.
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