पार्टी पर निशाना साधा है.इस पत्र में रतन टाटा ने स्पष्ट तौर पर कहा कि भारतीय जनता पार्टी के शासन काल के दौरान दूरसंचार नीति में बार-बार बदलाव हुए और स्पैक्ट्रम घोटाले की जाँच 2001 से होनी चाहिए.रतन टाटा को ये खुला पत्र लिखने के लिए निर्दलीय राज्य सभा सांसद और फिक्की के पूर्व अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मजबूर किया.
राजीव चंद्रशेखर ने रतन टाटा के नाम लिखे एक खुले पत्र में कहा था कि रतन टाटा की कंपनियों को जिन नीतियों से फ़ायदा हुआ अब वो उन्हीं नीतियों की अलोचना कर रहे हैं तो ऐसे में ये विरोधाभास क्यों?
राजीव चंद्रशेखर ने लिखा कि रतन टाटा की कंपनी टाटा टेलिसर्विसेज़ को स्पैक्ट्रम बाँटने के लिए अपनाई गई ‘पहले आओ पहले पाओ’ की नीति का सबसे ज़्यादा फ़ायदा हुआ.स्पैक्ट्रम के लिए 2007 में 343 कंपनियों के आवेदन को नकार दिया गया था लेकिन ठीक 19 दिन बाद 'ड्यूल यूज़ टेक्नोलॉज़ी' नीति की घोषणा की गई, जिसके तहत टाटा को जीएसएम लाइसेंस मिल भी गया.
राजीव चंद्रशेखर ने लिखा कि रतन टाटा दूरसंचार नीति में बार बार बदलाव को ग़लत ठहरा रहें हैं जबकि नीति में सबसे बड़ा बदलाव 2001 में हुआ. उस समय फ़िक्सड टेलिफ़ोन के लिए लाइसेंस धारी कंपनियों को सेल्युलर मोबाईल सेवा का लाइसेंस दे दिया गया. राजीव चंद्रशेखर ने रतन टाटा के ये कहने पर भी टिप्पणी की है कि वे भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ है.
उन्होंने कहा कि जब रतन टाटा से हवाई सेवा चलाने के लिए 15 करोड़ की रिश्वत माँगी गई तब वो चुप क्यों रहे? घटना के 15 साल बाद ये बात उठाना भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना नहीं बल्कि सिर्फ बौद्धिक चर्चा भर है.इन सब आरोपों ने ही रतन टाटा को इस खुले पत्र का जवाब देने के लिए मजबूर किया.
रतन टाटा ने कहा कि टाटा समूह कि कंपनियों को संचार मंत्री ए राजा या अन्य किसी पूर्व मंत्री की किसी नीति से कोई ग़लत फ़ायदा नहीं हुआ.रतन टाटा ने इसके जवाब में लिखा “रजीव चंद्रशेखर का राजनैतिक झुकाव किस ओर है ये सभी जानते हैं.”रतन टाटा ने लिखा कि राजीव चंद्रशेखर ने राजनैतिक इच्छाशक्तियों की पूर्ति और प्रधानमंत्री और सत्ताधारी पार्टी को शर्मिंदा करने के लिए ये पत्र लिखा है.
इस पत्र में रतन टाटा ने स्पष्ट तौर पर कहा कि भारतीय जनता पार्टी के शासन काल के दौरान दूरसंचार नीति में बार-बार बदलाव हुए और स्पैक्ट्रम घोटाले की जाँच 2001 से होनी चाहिए.रतन टाटा कहते हैं “ मैं मौजूदा जाँच का समर्थन करता हूँ और ये जाँच 2001 से होनी चाहिए.”
राजनैतिक प्रतिक्रिया
रतन टाटा के इस बयान पर भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा, “रतन टाटा एक महान उद्योगपति हैं, उन पर मैं टिप्पणी नहीं करना चाहता. पर वो जो इस विषय में बोल रहे हैं, याद रहे कि उनकी भी एक टेलिफ़ोन कंपनी है. उनको यूपीए की नीतियों का ज़्यादा लाभ मिला होगा. भाजपा कि नीतियों से उन्हें इतना लाभ नहीं मिला होगा, उनका दुख हम समझ सकते है.”वहीं दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने रतन टाटा की टिप्पणी पर कुछ कहने से इंकार कर दिया पर इतना ज़रुर कहा, “उन्होंने कोई टिप्पणी की है तो ज़रूर उनके पास इस बारे में जानकारी होगी.”
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